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मुजफ्फरपुर चमकी बुखार पीड़ित नौनिहालों से मिलने पहुंचे, कहा दुखी मानवता की सेवा धर्म, निष्काम मानव सेवा के लिए सदैव तत्पर :रितेश रंजन


सिमरी बख्तियारपुर, (सहरसा)।


मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देने वाली मुजफ्फरपुर में इंसेफेलाइटिस चमकी बुखार से मरने वाले मासूम बच्चों की मौत एक बार देश में बिहार को सुर्खियों में ला दिया है। ऐसे में जहां सत्तासीन राजनीतिक दल के वरीय नेताओं ने मुजफ्फरपुर जाकर सिर्फ राजनीतिक खाना पूर्ति की है। वही कुछ राजनीतिक लोगों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुजफ्फरपुर के दलित बस्तियों में जाकर मानवीय वसूल के सिद्धांत को कायम करने का प्रयास किया है। इसी छोटे से प्रयास की कड़ी में पूर्व जिप उपाध्यक्ष रितेश रंजन, पूर्व जिला पार्षद प्रवीण आनंद, पूर्व पार्षद निर्मल ठाकुर, अशोक भगत एवं भूषण कुमार अपने के टीम के साथ तीन दिवसीय दौरे पर हैं।

टीम मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड के विभिन्न महादलित टोला कलवारी टोला, मल्लाह टोला, फतेहपुर, मधुबन, मानिकपुर,  पासवान टोला जैसे कई टोला में जागरूकता अभियान चलाकर सभी जगह ओआरएस, ग्लूकोज एवं थर्मामीटर का वितरण किया। साथ ही एवं बुखार से पीड़ित बच्चे अंकित पासवान एवं राजू को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कर समुचित इलाज करवाने का काम किया। पूर्व जिप उपाध्यक्ष रितेश रंजन ने कहा कि इससे पहले लगभग 7 वर्षों से बच्चों की इस बीमारी से मौत होती रही है। क्या इस देश की नौनिहालों पर यू ही ग्रहण लगता रहेगा। सूवे की स्वास्थ्य विभाग ने इस बुखार जैसी बीमारी का कोई इलाज अब तक खोज पाया है। ना ही किसी कमेटी का गठन हुआ है। मृतक बच्चों के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं।

सूवे की डबल इंजन की सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। ऐसे समय में अपनी टीम की ओर से निवेदन करता हूं, कि अब सरकार नहीं खुद को आगे आना होगा। मुजफ्फरपुर की आवाज इन दिनों एक मृतक बेटे के मां एवं पिता के करूण क्रंदन से गूंज रहा है। कितनी मां का आंचल सूना हो गया है। वेवस बेजुबान नौनिहालों का क्या कसूर हैं। यहां की पीड़ित जनता सूवे की सरकार से पूंछ रही है। अंत:आप तमाम बिहार के लोगों से अपील है, कि छोटी-छोटी टीम बनाकर मुजफ्फरपुर कूच करे एवं मासूम बच्चों के हित में जो बन पड़े वह समाजसेवा का निस्वार्थ काम करे।

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