सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को नाम वापसी के साथ निर्दलीय प्रत्याशी को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया है। गुरुवार को 2 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। अब चुनावी दंगल में कुल 6 प्रत्याशी अपने भाग्य आजमा रहे हैं। सिमरी बख्तियारपुर एसडीएम सह निर्वाची पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने वाले दीपक यादव एवं डोमी शर्मा ने अपना नामांकन का पर्चा वापस ले लिया है। अब कुल छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। जनता दल यू से डॉक्टर अरुण कुमार (तीर), राजल से जफर आलम (लालटेन), वीआईपी से दिनेश कुमार निषाद (आदमी व पालयुक्त नौका), राष्ट्रीय जन संभावना पार्टी से उपेंद्र सहनी (फूलगोभी), मिथिला पार्टी से उमेश चंद्र भारती (हेलीकॉप्टर) के चुनाव चिन्ह है। वही निर्दलीय से एकमात्र प्रत्याशी सोना कुमार को (अलमीरा) चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया है।
सिमरी बख्तियारपुर,(सहरसा)। सीताराम प्रसाद गुप्ता समय की धारा बहुत कुछ बहा ले जाती है, लेकिन कुछ स्मृतियाँ ऐसी होती हैं जो जीवनभर मन की गहराइयों में तैरती रहती हैं। आज भी जब दुर्गा पूजा के अवसर पर ढोल-नगाड़ों की थाप सुनाई देती है और हवा में अगरबत्ती की सुगंध घुलती है, तो मेरा मन बरबस पचास वर्ष पीछे लौट जाता है। बचपन का वह सुनहरा समय, जब दशहरा केवल पर्व नहीं बल्कि जीवन का उत्सव हुआ करता था। पिता की दुकान और पूजा का माहौल: मेरे पिता जी की प्रसिद्ध दुकान उस समय इलाके की बड़ी दुकानों में गिनी जाती थी। दुकान का नाम मेरे दादाजी एवं पिताजी के नाम से अमृतलाल सुभूक लाल फार्म का नाम हुआ करता था। इस दुकान में थोक एवं खुदरा किराने की दुकान हुआ करती थी। दशहरा के पूर्व के दुकान का दृश्य अद्भुत होता। —अगरबत्तियों की खुशबू, नारियल, खाद्य सामग्री, तेल, डालडा की न बिक्री जोरों से होती थी। एवं ग्राहक की माँग पूरी करते। हम चारों भाई नन्हें-नन्हें कदमों से दुकान पर चक्कर लगाते रहते। एवं ग्राहकों की भीड़ एवं चहल-पहल को देख विस्मित हो जाते। यह सब हमारे लिए किसी जादुई दुनिया जैसा था। बैलगाड़ी की सजा...


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