भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह थें: रामकृष्ण साह
सहरसा:
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती विजय दिवस सहरसा स्थित स्थित वीर कुंवर सिंह चौक पर समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर वैश्य समाज के कार्यकताओं ने वीर कुंवर सिंह चौक पर पहुंच कर बाबू कुंवर सिंह की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया गया। यह कार्यक्रम वैश्य समाज सहरसा के जिलाध्यक्ष रामकृष्ण साह उर्फ मोहन साह के नेतृत्व में किया गया। मौके पर वैश्य समाज के जिलाध्यक्ष रामकृष्ण साह उर्फ मोहन साह ने कहा कि 1857 से पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह की कृति आज भी लोगों के स्मृतियों में है। अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले वीर कुंवर सिंह अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं। 80 साल की उम्र में भी उन्होंने जो हिम्मत एवं साहस का परिचय दिया। वह इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है। बाबू वीर कुंवर सिंह के अंदर नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। 80 साल की उम्र में दुश्मनों से लड़ने और जीत हासिल करने की जरूरत के लिए जाना जाते थे। वे आज भी अजर अमर है। उनके कृतित्व से आज की युवाओं को सीख लेनी चाहिए। वही वैश्य समाज के प्रवक्ता राजीव रंजन साह ने वीर सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह जी के विजयोत्सव के अवसर नमन करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति में वीर कुंवर सिंह ने बिहार में विद्रोह का नेतृत्व किया। वे लगभग 80 वर्ष के थे। एवं उन्होंने अपने नेतृत्व में एक मजबूत सैन्य शक्ति बनाई थी। कुंवर सिंह ने बिहार में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया और आरा में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध किया। उन्होंने आरा पर कब्जा कर लिया और अंग्रेजों को हराया। उपाध्यक्ष कृष्णमोहन चौधरी एवं महासचिव शशिभुषण गांधी ने कहा कि कुँवर सिंह बचपन से ही साहसी एवं उदार दिल के थे। उन्होंने सभी के लिए स्कूल, तालाब, रास्ते भी बनवाए और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। वें स्वाभिमानी व्यक्ति थे। बूढ़े शूरवीर की अवस्था में भी युद्ध के लिए तत्पर हो गए थे। पूर्व वार्ड पार्षद सुबोध साह एवं महासचिव संजय कुमार ने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत किसी भी स्तर पर कुंवर सिंह को पकड़ना चाहती थी। अंग्रेजों ने डगलस को भेजा। डगलस भी कुंवर सिंह को नहीं पकड़ पाया। 21 अप्रैल 1858 को जब कुंवर सिंह शिवपुर घाट से गंगा नदी पार कर रहे थे, तभी उन्हें दाहिने हाथ में गोली लग गई। तब भी कुंवर सिंह ने शरीर मे जहर नहीं फैले तो अपनी भुजा काट गंगा मैया को समर्पित कर दिया। मौके पर युवा अध्यक्ष अजीत कुमार अजय, मीडिया प्रभारी नीरज राम उर्फ़ सोनू गुप्ता, जदयू नेता कमल नरायाण गुप्ता, पूर्व पार्षद संतोष कुमार मुंगेरी, संतोष गुप्ता, नाई संघ के अध्यक्ष बिजेंद्र ठाकुर, सचिव शिवशंकर ठाकुर, संगठन मंत्री पवन ठाकुर, दीपक कुमार फोटो, अरूण जयसवाल, सुरेंद्र तांती आदि सहित अन्य ने वीर कुंवर सिंह जी की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

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