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सहरसा के भोटिया दुर्गा मंदिर में निःसंतान दंपत्ति की भर जाती झोली, मंदिर में होती है मां की पिंड की पूजा

सिमरी बख्तियारपुर - ( सहरसा)।
 अनुमंडल के मोहम्मदपुर पंचायत के भोटिया ग्राम स्थित मां भगवती दुर्गा स्थान मंदिर 110 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इस मां के के दरबार से नि:संतान दंपति आज तक खाली हाथ नहीं लौटे हैं। श्रद्धालुओं की इस माँ भगवती स्थान पर काफी आस्था एवं विश्वास है।
भोटिया के प्रसिद्ध मंदिर में माँ भगवती का एक पिंड स्थापित है। सन् 1909 में रघुवीर सिंह ने स्थापित किया था। रघुवीर सिंह के वंशज बबन बाबू कहते हैं, कि यह मंदिर 110 वर्ष से भी अधिक पूर्व का है। गांव के 80 वर्षीय वृद्ध भरत प्रसाद सिंह ने बताया कि मेरे दादा के जमाने से ही पूजा की जाती है, एवं सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल में पूर्व में एकमात्र सर्वप्रथम यहीं से पूजा होती थी। हमारे पूर्वज ने भवगती स्थान में पिंड स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की थी। आज भी पिंड की पूजा होती है। तत्पश्चात स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से भव्य एवं आकर्षक मंदिर का निर्माण कराया गया।
किदवंतियों के अनुसार दूर्गा पूजा नवरात्रा के दौरान माँ से मांगी गयी मन्नते जरूर पूरा होती है। स्थानीय श्रद्धालु सहित दूर-दराज से नि:संतान दंपति काफी संख्या में आकर माँ भगवती के दरबार में मत्था टेक कर पुत्र रत्न प्राप्ति की मन्नते मांगते हैं।
मंदिर के कुल पुरोहित के आर्चाय ने बताया कि कोई भक्त सच्चे मन से भगवती से मनोवांछित फल की कामना करते हैं, तो मां उसका दामन खुशियों से भर देते हैं। यही कारण है, कि यहां आए दिन श्रद्धालुओं में भीड़ बढ़ती जा रही है। सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के भोटिया ग्राम निवासी अपने कुलदेवी की पूजा अथवा दुर्गा पुजा( दशहरा) बड़ी धूम-धाम हर्षोल्लास के साथ मनाते है। यहां कलश स्थापना के बाद पूजा अर्चना के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है। मंदिर में सार्वजनिक कलश स्थापित किया जाता है। यहां खजुरी ग्राम के कुल पुरोहित सीताराम मिश्र, राजकुमार मिश्र एवं पड़री गॉव के आचार्य पंडित रंजीत झा के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना 10 दिनों तक किया जाता है। माता के पूजा में सुरेश प्रसाद सिंह जजमान के रूप मे बैठते हैं। इस बार 07:00 बजे संध्या आरती होने के पश्चात पुरी रात प्रोजेक्टर के माध्यम से रामायण सीरियल दिखाया जाता है। जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। खासकर माता के पुजा मे सुबह एवं शाम शहनाई का बजना अनिवार्य होता है। जो कि पूर्व से ही ऐसी प्रथा चली आ रही है। जब तक शहनाई का बजने के उपरांत पूजा शुरू हो जाता है। शहनाई वादक जो सलखुआ प्रखंड के खजूरदेवा गांव निवासी शंभू राम अपने चार पांच सहयोगी के साथ 10 दिन तक रह कर माता के दरबार में अपना हाजिरी लगाते हैं। इतना ही नहीं ये लोग तीन पुस्तो से यहां शहनाई बजाने का काम करते आ रहे हैं। मेला कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह, सचिव विनोद कुमार सिह 'बबन, सदानंद सिंह, सतेंद्र सिंह, व्यवस्थापक बिपिन कुमार सिंह, सदस्य रंजन, निवारन, राहुल, भुषण, बिट्टू संजीव, प्रभाकर हैं।

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