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मेरी यात्रा कहलगांव: गंगा नदी के बीच स्थित 3 खूबसूरत एवं अद्भुत रिवर आइलैंड शांति धाम का ऐतिहासिक महत्व

कहलगांव, राजेश गुप्ता।
बिहार का सिल्क नगरी भागलपुर जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर एवंं गंंगा नदी तट पर बसा कहलगांव एनटीपीसी के (इलेक्ट्रिक पावर प्लांट्स) के लिए भी जाना जाता है। लेकिन यह भागलपुर जिले का एकमात्र अनुमंडल के साथ नगर पंचायत है। इस इलाके की गंगा में अवस्थित 3 पहाड़ियां का भी धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। इस पहाड़ी के ऊपर बाबा का मंदिर श्रद्धालुओं के पूजा पाठ एवं आस्था का केंद्र बना हुआ रहता है। वही इन पहाड़ियों का मनोरम दृश्य अनायास लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
कहलगांव का नामकरण: किंवदंतियों के अनुसार यहां पर एक ऋषि रहा करते थे। जिसका नाम कहल था। उन्ही के नाम पर इस जगह का नाम कहलगांव रखा गया। कहलगांव ट्रेन, सड़क एवं जल मार्ग से भी जाया जाता है।
3 आईलैंड:
भागलपुर से अगर आप गंगा नदी के रास्ते कहलगांव जायेंगे। या फिर ट्रेन या सड़क मार्ग से कहलगांव पहुंचेंगे। तो वहां से 1 किलोमीटर स्थित गंगा तट जाएंगे तो आपको विशाल गंगा नदी के बीच में 3 आइलैंड नजर आएंगे ये आइलैंड किसी समुद्री आईलैंड कम नहीं लगते है। इस आइलैंड की खूबसूरती को बयां करना वैसे तो शब्दों में संभव नहीं है। लेकिन जब आप वहां जाएंगे तो शांति, सुकुन एवं मनोरम प्राकृतिक छटा का दर्शन के साथ आस्था का प्रतीक शांति बाबा का दर्शन भी कर पाएंगे।
धार्मिक महत्व:
प्राचीन काल से यह क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। आप जब यहां पहुंचेगे तो आपको इस बात का एहसास हो जायेगा। कहलगांव में गंगा दक्षिण से उत्तर की तरफ बहती है। उत्तरायणी गंगा की धारा का महत्व कई शास्त्रों में उल्लेखनीय है। इसी जगह पर गंगा नदी के ठीक बीच में एक बेहद मनोरम पहाड़ी द्वीप है। इस द्वीप पर एक आश्रम है, जिसे शांति धाम के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में यह धाम एवं रिवर आइलैंड देश विदेश के पर्यटकों के बीच में आस्था का केंद्र बना रहता है। आस्था का कारण यह है की गंगा नदी की सैकड़ों वर्षों से उत्तरवाहिनी धारा की साक्षी रही। दूसरा इस पहाड़ी पर बर्ह्मलीन शांति बाबा की समाधी है। शांति धाम वाले आईलैंड पहाड़ी पर घूमने के बाद पर्यटक इससे बिलकुल सटी हुई दो अन्य खूबसूरत पहाड़ियों पर घूमने के लिए अवश्य जाते हैं। यह पहाड़ी सिक्ख धर्म के लिए भी आकर्षण का केंद्र है क्योंकि पहाड़ी पर स्थित मंदिर में सिखों के पवित्र गुरु ग्रन्थ साहिब स्थापित है। इसलिए यहां पर सिख धर्मावलम्बी भी काफी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं। वर्तमान में शांति धाम के संचालक शांति बाबा के शिष्य केदार बाबा बताते हैं की सन् 1900 में राजस्थान के झुंझनू में शांति बाबा का जन्म हुआ था। उन्होंने इस पहाड़ी पर आकर काफी सालों तक तपस्या की एवं फिर उन्होंने यहीं पर अंतिम समाधी ली थीं। एवं तब से उनके पुण्य तिथि पर उनके समाधी के पास हर साल एक सांप आते है एवं थोड़ी देर रुकने के बाद वहां से चले जाते हैं। इस आईलैंड से सटे कहलगांव के स्थानीय निवासी आशीष गुप्ता, सुरज गुप्ता, सत्या गुप्ता एवं राकेश गुप्ता आदि लोगों के अनुसार शांति बाबा की पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में भारत के विभिन्न हिस्सों के अलावा कनाडा, सिंगापुर एवं नेपाल से भारी संख्या में शांति बाबा के अनुयायी यहां पहुंचते हैं। इस पहाड़ी को हम लोग अपने बचपन काल से ही देखते आ रहे हैं। इसकी प्रसिद्धि काफी बढ़ी है। लेकिन सरकार के द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 
मौनी बाबा के शिष्य:
बेल्लूर मठ के मौनी बाबा के शिष्य शांति बाबा इस पहाड़ी पर 1930 में आये थे। एवं 1970 में वो ब्रह्मलीन हो गए थे। हर साल उनके पुण्यतिथि पर आश्रम को भव्य रूप में सजाया जाता है एवं यहां पर लंगर का आयोजन किया जाता है। लंगर में प्रसाद के रूप में खिचड़ी, चने की घुघनी एवं हलवा परोसा जाता है। बाबा के पुण्यतिथि के अवसर पर लगभग 50 हजार से ज्यादा लोग यहाँ पहुंचते हैं। 
पर्यटन विभाग:
इन रिवर आइलैंड की प्राकृतिक छटा इसे अद्भुत और मनोरम बनाती है। आप बिहार घूमने आते हैं तो इस जगह पर जरूर आएं। हालांकि ये अभी भी बिहार पर्यटन विभाग के द्वारा इसकी विकास की सुधि नहीं ली है। यहां पर्यटकों की भीड़ सिर्फ शांति बाबा के पुण्य तिथि के अवसर पर ही दिखाई देती है। शेष किसी भी दिन आप यहां पर घूमने जा सकते हैं।
एकमात्र नाव सवारी:
कहलगांव भागलपुर से सड़क मार्ग एवं रेल मार्ग दोनों जुड़ा हुआ है। यहां पहुंचने में आपको कोई परेशानी नहीं होगी। आप मानसून में यहां की यात्रा न करें, क्योंकि बारिश के समय गंगा नदी पुरे उफान पर होती है। जैसा आपने तस्वीरों में देखा की पहाड़ी तक पहुंचने के लिए आपको नाव ही एकमात्र साधन है।

टिप्पणियाँ

  1. जितना ही मनोरम और आकर्षक उक्त स्थल हैं उतनी ही शानदार और जीवंत प्रस्तुति आपके द्वारा की गई है!👌👌

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