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सरस्वती पूजा को लेकर तैयारी अंतिम चरण में, कोरोना काल एवंं ठंड के कारण फीका पड़ा पूजनोंउत्सव।


सिमरी बख्तियारपुर, सहरसा।
अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ एवं बनमा इटहरी प्रखंड में 5 फरवरी आज सरस्वती पूजा को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। कोरोना काल को लेकर सरकारी एवं गैर  सरकारी स्कूलों में मां सरस्वती की पूजा अर्चना नहीं की जा रही है। कुछ प्राइवेट स्कूलों में सीमित तौर पर सरस्वती मां के फोटो को रखकर पूजा अर्चना की जा रही है। ऐसे में सरस्वती मां के प्रतिमा एवं सजावटी दुकानदारों की बिक्री नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है। शुक्रवार को प्रतिमा बनाने वाले कारीगर के स्थल पर काफी अधिक संख्या में बिना अंतिम रूप दिए सरस्वती प्रतिमा रखे हुए हैं। वही बचीं कसर शुक्रवार की देर रात से हो रही रिम झिम बारिश एवं कड़ाके की ठंड ने लील ली से।

सजावट दुकान पर भीड़ कम:
इस बार सरस्वती पूजा में मूर्तिकार को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा है, वहीं दूसरी ओर सजावटी दुकानदारों के बीच की मंदी छाई हुई है। लाखों रुपए के सजावटी सामान इन दुकानदारों के गोदाम में पड़े हुए हैं। लेकिन खरीदार नजर नहीं आ रहे हैं। वही प्रसाद के रूप में फल की के दुकानदारों की बिक्री भी प्रभावित हुई है।
पूजा पर कोरोना ग्रहण:
मालूम हो कोरोना काल से पूर्व विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थान, चौक चौराहे एवं मोहल्ले में सफलता पूर्वक सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाया जाता था। वसंत पंचमी को सदियों से हर साल छात्रों व शिक्षकों द्वारा शिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजन करने की प्रथा थी। सरस्वती पूजन शिक्षण संस्थानों के अलावे भी कई सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों द्वारा प्राय: हर गांव मोहल्ले के चौक- चौराहे पर भव्य पंडाल निर्माण कर किया जाता था। लेकिन इस बार यह रौनक देखने को नहीं मिल रही है।

मूर्ति व्यवसाय प्रभावित:
सिमरी बख्तियारपुर नगर परिषद  सहित अनुमंडल के कस्बाई एवं ग्रामीण इलाकों में मूर्तिकारों के द्वारा अपने सहयोगियों के साथ युद्ध स्तर पर मां सरस्वती के प्रतिमा को अंतिम रूप देने में दिन रात का लगे हुए रहते थें। लेकिन इस बार कोरोना काल में मूर्तिकार परेशान है। प्रतिमा के बिक्री आधे से भी कम है। जो मूर्तिकार दिन रात प्रतिमा को अंतिम रूप में देने में लगे रहते थे। वे आज खाली बैठे हुए हैं। शुक्रवार को मूर्ति परिसर में अर्ध निर्मित बने मूर्ति रखे हुए हैं। ग्राहकों की भीड़ अन्य वर्षो की अपेक्षा इस बार नहीं के बराबर है। कई ग्राहक एडवांस देने के बाद भी मूर्तिकार से मां सरस्वती की प्रतिमा लेने नहीं पहुंचे हैं। 

शिक्षण संस्थान:
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अरविंद कुमार महतो ने बताया कि शिक्षण संस्थान के वरीय अधिकारी के निर्देश के आलोक में सरकारी, गैर सरकारी स्कूल एवं कोचिंग संस्थान परिसर में कोरोना काल एवं स्कूल बंदी के हालात में सरस्वती पूजा का आयोजन नहीं होगा। न ही किसी भी प्रकार का समारोह आयोजित किया जाएगा।

क्या कहते हैं, अधिकारी:
सिमरी बख्तियारपुर एसडीओ अनीषा सिंह ने बताई कि कोविड-19 के मुद्दे नज़र सरस्वती पूजा कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाना है। पांच फरवरी को बसंत पंचमी एवं सरस्वती पूजा है। एसडीओ ने सभी लोगों से कहा कि आप सभी पूरी श्रद्धा के साथ सरस्वती की पूजा आराधना करें। लेकिन कहीं भी सार्वजनिक जगहों पर भीड़ इकट्ठा नही हो इसका ख्याल रखेंगे। एसडीओ ने कहा कि पूजा पंडाल निर्माण की अनुमति एवं लाइसेंस निर्गत नहीं किया जाएगा। सरस्वती पूजा के मेला पर प्रतिबंध है। मास्क, सामाजिक दूरी का पालन करना है। पूजा समिति के द्वारा डीजे बजाना पूर्ण प्रतिबंधित है। पूजा समिति द्वारा महाप्रसाद का आयोजन नहीं किया जाएगा। वही विसर्जन कार्यक्रम में पूरी सादगी के साथ मात्र 20 आदमी विसर्जन में बिना जूलूस का किया जाएगा।

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